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ओबामा ने मांगा विरोधियों से सहयोग

चुनाव से पहले ओबामा की बस यात्रा, सीधा संवाद खास मकसद से

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चीन के पहले विमानवाहक पोत का परीक्षण शुरू

खर्चों में कटौती के साथ विकास का ध्यान रखना होगा - लैगार्ड

गद्दाफी समर्थकों ने दागे स्कड मिसाइल

 

संकट में घिरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था

ओबामा ने मांगा विरोधियों से सहयोग

 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 13 अगस्त को अपने राजनीतिक विरोधियों से 'दलगत राजनीति' से ऊपर राजनीतिक गतिरोध समाप्त करने की अपील की ताकि देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को फिर पटरी पर लाया जा सके। ओबामा ने देश की संकट में घिरी अर्थव्यवस्था में और अधिक रोजगार सृजित करने के अपने प्रस्तावों पर विपक्षी दलों से समर्थन चाहा है। देश के आर्थिक संकट को संभालने में अपने रवैये के लिए अनेक वर्गों से आलोचना का सामना कर रहे ओबामा ने संकट से उबरने के उपायों पर गहरे राजनीतिक मतभेद की तीखी आलोचना की। उन्होंने विपक्ष की भी जिम्मेदारी की ओर संकेत करते हुए कहा, 'हम इस संकट में अचानक नहीं फंसे हैं।

राष्ट्र के नाम साप्ताहिक संबोधन में उन्होंने कहा कि हाल में राजनीतिक दलों का व्यवहार पक्षतापूर्ण रहा है, इस कारण बना गतिरोध आम लोगों का भरोसा कमजोर करने वाला है और इससे अर्थव्यवस्था को गति देने के हमारे प्रयास कमजोर होते हैं। ओबामा ने कहा कि अमेरिकी जनता को राजनीतिक चालबाजी नहीं चाहिए। उन्होंने वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध से परेशान जनता से भी अपील की कि वह अपने प्रतिनिधियों को यह बताए कि इस समय राजनीतिक विरोध के लिए विरोध करने की बजाय दलगत राजनीति से ऊपर उठने और देश हित में मिलकर काम करने की जरूरत है।

ओबामा ने कहा, हम अगले चुनावों को ध्यान में रखकर की जा रही क्षुद्र राजनीति को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दे सकते। जरूरत सही निर्णय करने की है। उन्होंने कहा कि आज हमारे राह की अड़चन यही है कि अमेरिकी संसद में कुछ लोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके विरोधी अगले चुनाव में हार जायें उन्हें अमेरिका की कामयाबी की चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संसद राष्ट्रपति के प्रस्तावों को मंजूरी दे जिनमें आयकर में कटौती की सीमा बढ़ाई जाए, लालफीताशाही खत्म हो और निर्माण क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ाई जाएं ताकि लोग काम पर लौट सकें और अर्थव्यवस्था फिर मजबूती से प्रगति करे और रोजगार के अवसर पैदा हों।

उन्होंने कहा कि कमजोरी अमेरिका में नहीं है लेकिन हमारी नीतियों में है जिसे हमें ठीक करना होगा। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि आपकी जेब में ज्यादा पैसा हो, अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़े।

 

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चुनाव से पहले ओबामा की बस यात्रा, सीधा संवाद खास मकसद से

 

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तेजी लाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के मकसद से 16 अगस्त को एक बस यात्रा शुरू की है। पर्यवेक्षक मान रहे हैं कि ये 2012 के राष्ट्रपति पद के चुनावों से पहले ओबामा के प्रचार का हिस्सा है। तीन दिन का यह दौरा उन्होंने आयोवा से शुरू किया और फिर वे मिन्नेसोटा और इलिनोए भी पहुँचे। गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स की ओर से अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग घटाने और फिर दुनिया भर के शेयर बाजार में मची उथल-पुथल के बाद ये दौरा हो रहा है। बुरी आर्थिक खबरों के बीच सर्वेक्षणों में ओबामा की लोकप्रियता घटती नजर आ रही है।

बीबीसी के उत्तर अमेरिका संपादक मार्क मार्डेल के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा मुश्किल में हैं। पहली बार उनकी लोकप्रियता 40 प्रतिशत से नीचे गिरी है और ये निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता कि वे 2012 का चुनाव जीत ही लेंगे। उनकी बस यात्रा उन्हें अमेरिका के देहात में ले जाएगी और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ये चुनाव प्रचार का एक नया चरण है।

मार्डेल के अनुसार ओबामा कुछ छोटी-मोटी आर्थिक घोषणाएं करेंगे अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर चिंतित अमेरिका में उन्हें ऐसा संदेश देने की जरूरत है जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे।

कोई भी राष्ट्रपति नौ प्रतिशत की बेरोजगारी दर के चलते दोबारा चुनाव नहीं जीता है और उनके प्रतिद्वंद्वी इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने वाशिंगटन में कहा, 'राष्ट्रपति लोगों से चर्चा करेंगे कि अर्थव्यवस्था को कैसे आगे बढ़ाया जाए, मध्यवर्ग को कैसे मजबूत किया जाए, शहरों-समुदायों में रोजगार पैदा किए जाएं, वे सीधे अमेरिकियों से सुनना चाहेंगे जिनमें छोटे व्यापारी, स्थानीय परिवार, निजी क्षेत्र में काम करने वाले, देहाती संस्थाएं और सरकारी अधिकारी होंगे। लेकिन अपने रेडियो संदेश मेें वे स्पष्ट कर चुके हैं - 'जहां हमारे देश के साथ कोई समस्या नहीं है, वहीं हमारी राजनीति में कुछ बहुत ही गलत है। हमें इसी का समाधान करना है, क्योंकि हम जानते हैं कि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) कई कदम उठा सकती है, इसी समय उठा सकती है, ताकि आपकी जेब में पैसा आए, ये अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़े और हमारे दोस्त-पड़ोसी दोबारा काम पर जाने लगें।'

पर्यवेक्षकों का मानना है कि ये ओबामा के 2012 के चुनावों को जीतने के प्रयास का नया चरण है क्योंकि उन्हें रिपब्लिकन पार्टी से जा रहे राजनीतिक संदेश को पलट कर अपना संदेश लोगों तक पहुँचना है।

 

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जर्मन लोगों को आज से पचास वर्ष पहले बर्लिन के बीचों बीच खिंची एक बड़ी दीवार ने दो हिस्सों में बांट दिया था। इस दीवार की वजह से अपने परिजनों से उस दौर में बिछुड़े लोगों पर आज भी इसका मनोवैज्ञानिक दबाव देखा जा सकता है।

इस अवसर पर 15 अगस्त को बर्लिन में आयोजित हुए कार्यक्रम में महापौर क्लाउस वाउवराइट ने कहा, यह दीवार इतिहास बन चुकी है। लेकिन हमें इसे भूलना नहीं चाहिए। हमें भविष्य की पीढ़ियों को इसके बारे में बताना होगा ताकि इस तरह का अन्याय खुद को दोबारा नहीं दोहरा सके। इस दौरान यहां जर्मनी के राष्ट्रपति क्रिस्टियान वुल्फ और चांसलर एंजेला मर्केल भी मौजूद थी। इस दीवार को पार करने की कोशिश में अपनी जान गंवा चुके सैकड़ों लोगों की याद में एक मिनट का मौन भी रखा गया। जर्मनी के एकीकरण का प्रयास करते हुये मारे गये सभी लोगों के बारे में भी बताया गया। इतने अधिक लोगों के नामों को एक के बाद एक पढ़े जाने में साढ़े सात घंटों का समय लगा।

बर्लिन को दो हिस्सों में बांटने वाली इस दीवार पर पूर्वी जर्मनी के सैनिकों ने 13 अगस्त 1961 को काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआत में महज कंटीले तारों और कच्ची सामग्री से बनाई गई इस दीवार की जगह जल्द ही कांक्रीट से बनी एक मजबूत दीवार ने ले ली थी जो 1989 में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एक हो जाने तक बनी रही थी। इस दीवार पर बनी सीमारेखा की सुरक्षा के लिए दोनों देशों ने 300 से अधिक सीमा चौकियों की स्थापना की थी जिस पर चौबीसों घंटे हथियारबंद सिपाही मुस्तैद रहा करते थे। यह दीवार शीतयुध्द काल में बंटे हुये दो वैचारिक खेमों का स्पष्ट बयान करती थी। पूर्वी जर्मनी सोवियत संघ के पक्ष वाले खेमे का नेतृत्व करता था अैर पश्चिमी जर्मनी अमेरिकी खेमे का पक्षधर था।

 

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चीन के पहले विमानवाहक पोत का परीक्षण शुरू

 

चीनी नौसेना के पहले विमानवाहक पोत ने समुद्र में परीक्षण शुरू कर दिए हैं, सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने सैनिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि मरम्मत के बाद पूर्व सोवियत युध्दपोत उत्तर पूर्व के शिपयार्ड से रवाना हो गया है।

इस नई गतिविधि से चीन के तेजी से हो रहे सैनिक सशक्तिकरण पर चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। चीन इस समय कई जल क्षेत्र विवादों में उलझा हुआ है। शिन्हुआ के मुताबिक विमानवाहक पोत पूर्वोत्तर प्राँत लियाओनिंग के बंदरगाह दालियान के शिपयार्ड से 13 अगस्त की सुबह रवाना हुआ है। समुद्र में अभ्यास के बाद भी पोत की मरम्मत और परीक्षण जारी रहेंगे।

यह विमानवाहक पहले सोवियत नौसेना का युध्दपोत हुआ करता था जिसका पुराना नाम वारयाग था। इस पोत की बनावट पुरानी है और इसको चीन ने नहीं बनाया है।

इसको सोवियत नौसेना के लिए 1980 के दशक में बनया गया था लेकिन यह कभी पूरी तरह बन नहीं पाया था। जब 1991 में सोवियत संघ का विघटन हुआ तो वारयाग का जंग लगता ढाँचा यूक्रेन के एक शिपयार्ड में खड़ा था। जब दूसरे सोवियत युध्दपोतों को कबाड़ के तौर पर तोड़ा जा रहा था तो चीन की एक कंपनी ने यह कहकर इसे खरीद लिया था कि वह मकाओ में इस पर तैरता हुआ कसीनो बनाना चाहती है। इस पोत को अंतत: चीन तक खींच कर ले जाने में कई साल लगे। बाद में इसे दालियान शिपयार्ड ले जाया गया।

पहली बार जून में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने पुष्टि की कि चीन अपना पहला विमानवाहक पोत बना रहा है, हालांकि हाल में चीन ने इसकी क्षमता को यह कहकर कम बताने की कोशिश की है कि इसका इस्तेमाल सिर्फ प्रशिक्षण और शोध के लिए किया जाएगा।

 

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खर्चों में कटौती के साथ विकास का ध्यान रखना होगा - लैगार्ड

 

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड ने 16 अगस्त को हुकूमतों को चेतावनी दी है कि वो खर्चों में कटौती और अल्प-अवधि में आर्थिक प्रगति के लिए फंड मुहैया कराने में सामंजस्य स्थापित करे। क्रिस्टीन लैगार्ड का कहना है कि यह 'डबल डिप रिसेशन' या मंदी की दोहरी मार से बचने के लिए जरूरी है। व्यवसाय जगत के अखबार 'द फाईनेंशियल टाईम्स' में लिखते हुए लैगार्ड ने माना है कि आर्थिक मजबूती के लिए कर्जों में कमी किए जाने की सख्त जरूरत है। लेकिन साथ ही कहा है कि अगर खर्चों में बहुत तेजी से कमी की गई तो इसका असर नौकरियों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अल्प-अवधि में विकास के लिए आर्थिक मदद दिया जाना अहम है।

उनका ये बयान वित्तीय बाजार में हाल में आई उथल-पथल और उसकी वजह से अमेरिका और यूरोपीय देशों के अधिक खर्चों पर उठे सवालों के बाद आया है। आईएमएफ प्रमुख ने कहा है कि हालांकि विश्व अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास कम हुआ है लेकिन अभी सारी नीतियों को लागू करके नहीं देखा गया। उन्होंने अखबार में कहा कि योजनाकारों को वही करना चाहिए जो उन्होंने साल 2008 की मंदी के समय एक ही लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया था। गौरतलब है कि यूरो मुद्रा क्षेत्र में आए कर्ज संकट के मसले को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सार्कोजी और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के बीच पेरिस में बैठक हो रही है। आईएमएफ प्रमुख ने कहा है कि बाजार आर्थिक मजबूती पर वाहवाही करता है लेकिन उसे विकास में कमी भी पसंद नहीं।

 

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गद्दाफी समर्थकों ने दागे स्कड मिसाइल

 

अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि लीबिया मेें कर्नल गद्दाफी की समर्थक सेना ने देश में जारी संघर्ष के दौरान पहली बार स्कड मिसाइल का इस्तेमाल किया है। 16 अगस्त को प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकारियों ने दावा किया है कि ये स्कड मिसाइल तटीय शहर सिरते से दागा गया और इसके निशाने पर ब्रेगा शहर था, जो विद्रोहियों के कब्जे में है। लेकिन इस मिसाइल हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, क्योंकि मिसाइल एक रेगिस्तानी इलाके में जाकर गिरा। अभी तक इस बारे में लीबियाई अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ये मिसाइल हमला ऐसे समय हुआ है, जब विद्रोही राजधानी त्रिपोली की ओर बढ़ रहे हैं। अभी तक विद्रोहियों ने सामरिक रूप से अहम दो शहरों में अपनी पकड़ मजबूत की है।

ये शहर दक्षिण और पश्चिम से राजधानी त्रिपोली की ओर जाने के संपर्क मार्ग हैं। त्रिपोली के पश्चिम में स्थित जाविया और दक्षिण में स्थित गरयान में लड़ाई जारी है।

 

 
 
     
     

 

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