|
|
| |
प्रमुख
आकर्षण
किसान
हमारे
प्रदेश
की
आत्मा
-
मुख्यमंत्री
सहकारी
समितियों
को
मजबूत
बनाएं
-
मुख्यमंत्री
डाउ
केमिकल्स
का
कड़ा
विरोध
हो
1
Top
गणतंत्र
दिवस
संदेश
किसान
हमारे
प्रदेश
की
आत्मा
- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
जबलपुर
के
पंडित
रविशंकर
शुक्ल
स्टेडियम
मैदान
में
26 जनवरी
को
राष्ट्रीय
ध्वज
फहराया।
गणतंत्र
दिवस
के
अवसर
पर
दिये
गये
अपने
संदेश
में
प्रदेशवासियों
को
बधाई
देते
हुए
कहा
कि
राज्य
सरकार
ने
प्रदेश
की
विकास
यात्रा
में
समाज
के
सभी
वर्गों
को
शामिल
किया
है।
उन्होंने
कहा
कि
प्रदेश
में
पिछले
5 सालों
में
कृषि
विकास
की
वार्षिक
दर
3 गुना
बढ़ी
है।
पहले
किसानों
को
16 प्रतिशत
ब्याज
पर
सरकारी
कर्ज
मिलता
था
जो
अब
1 प्रतिशत
कर
दिया
गया
है।
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
प्रदेश
में
उपलब्ध
विद्युत
क्षमता
9000 मेगावॉट
है
जिसमें
अगले
3 साल
में
4745 मेगावॉट
की
वृध्दि
करने
का
लक्ष्य
है।
सड़क
पर
बात
करते
हुये
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
प्रदेश
में
सड़कों
के
निर्माण
में
तेजी
लायी
जायेगी।
मध्यप्रदेश
सड़क
विकास
निगम
के
द्वारा
16000 करोड़
रुपये
की
लागत
से
6690 किलोमीटर
सड़कों
का
निर्माण
किया
जायेगा।
उन्होंने
कहा
कि
ग्राम
पंचायतों
के
बुनियादी
विकास
कार्यों
के
लिये
पंच-परमेश्वर
योजना
शुरू
की
गई
है।
रोजगार
गारंटी
योजना
से
पिछले
वर्ष
25 लाख
परिवार
लाभान्वित
हुए
तथा
56 हजार
विकास
कार्य
पूर्ण
किये
गये
हैं।
युवा
शक्ति
पर
जोर
देते
हुए
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
युवा
शक्ति
प्रदेश
के
नवनिर्माण
की
आधारशिला
है
इसीलिए
प्रदेश
में
राज्य
युवा
आयोग
का
गठन
किया
जायेगा।
मुख्यमंत्री
द्वारा
गणतंत्र
दिवस
के
अवसर
पर
दिये
गये
संदेश
के
संपादित
अंश
यहां
प्रकाशित
किये
जा
रहे
हैं।
गणतंत्र
दिवस
के
पावन
पर्व
पर
आप
सभी
को
हार्दिक
बधाई
और
शुभकामनाएं।
आज
का
दिन
उन
मूल्यों
और
प्रतिज्ञाओं
के
प्रति
स्वयं
को
पुन:
समर्पित
करने
का
दिन
है
जिनके
आधार
पर
स्वराज
की
स्थापना
हुई।
सरकार
की
कार्यशैली
और
विकास
की
हमारी
अवधारणा
समाज
और
सरकार
की
सहभागिता
पर
आधारित
है।
शासन-प्रशासन
आम
आदमी
की
खुशहाली
और
प्रगति
के
लिए
प्रतिबध्द
है।
विकास
यात्रा
राज्य
सरकार
ने
प्रदेश
की
विकास
यात्रा
में
समाज
के
सभी
वर्गों
को
शामिल
किया
है।
समावेशी
और
समग्र
विकास
के
लिए
हमारी
दृष्टि
में
सामाजिक
प्रगति
और
अधोसंरचना
का
विकास
एक
दूसरे
के
पूरक
हैं।
यह
गर्व
का
विषय
है
कि
पिछले
3 वर्षों
में
प्रदेश
में
विकास
की
दर
9 प्रतिशत
से
अधिक
रही।
कुशल
वित्तीय
प्रबंधन
और
परिणाममूलक
नीतियों
के
कारण
प्रदेश
की
अर्थ-व्यवस्था
निरन्तर
मजबूत
हो
रही
है।
हमें
विश्वास
है
कि
7.6
प्रतिशत
के
लक्ष्य
के
विरुध्द
हम
इस
पंचवर्षीय
योजना
में
10
प्रतिशत
से
अधिक
विकास
दर
हासिल
कर
लेंगे।
कृषि
किसान
हमारे
प्रदेश
की
आत्मा
हैं।
यह
उनके
श्रम
का
ही
फल
है
कि
विगत
5 सालों
में
कृषि
विकास
की
वार्षिक
दर
3 गुना
बढ़ी
तथा
हमें
विश्वास
है
कि
अब
यह
लगभग
10 प्रतिशत
हो
जायेगी।
सहकारी
कर्जों
पर
कभी
16 प्रतिशत
ब्याज
लिया
जाता
था
जो
अब
मात्र
1 प्रतिशत
है।
विभिन्न
अनुदान
अब
किसानों
के
खातों
में
सीधे
जमा
किये
जा
रहे
हैं।
गेहूं
पर
100 रुपये
और
धान
खरीदी
पर
50 रुपये
प्रति
क्विंटल
बोनस
दिया
जा
रहा
है।
गेहूं
के
50 लाख
टन
खरीदी
के
साथ
प्रदेश
उपार्जन
में
अब
देश
में
तीसरे
नम्बर
पर
है।
विगत
वर्ष
पाले
से
फसलों
का
नुकसान
होने
पर
सरकार
ने
1400
करोड़
रुपये
की
राहत
राशि
किसानों
को
बांटी
थी।
राहत
देने
के
मापदण्डों
और
प्रक्रियाओं
में
किसानों
के
हितों
के
अनुरूप
निरन्तर
परिवर्तन
किये
जा
रहे
हैं।
भू-राजस्व
संहिता
में
भी
व्यापक
परिवर्तन
किये
गये
हैं।
कृषि
केबिनेट
की
स्थापना
से
किसान
केन्द्रित
नीतियां
बनाने
और
उनके
क्रियान्वयन
में
गति
आयी
है।
इस
वर्ष
पृथक
कृषि
बजट
प्रस्तुत
करने
का
ऐतिहासिक
कदम
भी
उठाया
जा
रहा
है।
फल
और
सब्जियों
की
फसल
अब
मंडी
से
बाहर
प्रतियोगी
दरों
पर
बेचने
की
अनुमति
दे
दी
गयी
है।
कृषि
के
मशीनीकरण,
उद्यानिकी,
पशु
पालन,
मछली
पालन
तथा
अन्य
संबंधित
गतिविधियों
को
बढ़ावा
दिया
गया
है।
प्रदेश
में
गौ-वंश
वध
प्रतिषेध
(संशोधन)
विधेयक
की
स्वीकृति
से
गौ-वंश
की
हत्या
पर
प्रभावी
अंकुश
लग
सकेगा।
जबलपुर
में
चिकित्सा
विश्वविद्यालय
की
स्थापना
के
बाद
अब
अन्तर्राष्ट्रीय
स्तर
का
कृषि
अनुसंधान
केन्द्र
भी
स्थापित
होने
जा
रहा
है।
सिंचाई
सरकार
के
निरन्तर
प्रयासों
के
फलस्वरूप
निर्मित
सिंचाई
क्षमता
के
उपयोग
में
इस
वर्ष
अभूतपूर्व
वृध्दि
हुई
है।
इस
वर्ष
रबी
सिंचाई
में
7 लाख
50 हजार
हैक्टेयर
की
वृध्दि
की
जा
चुकी
है,
जो
गत
वर्ष
की
तुलना
में
75 प्रतिशत
अधिक
है।
विगत
डेढ़
वर्ष
में
650 लघु
सिंचाई
परियोजनाएँ
पूर्ण
कर
किसानों
को
पानी
उपलब्ध
कराया
गया।
बरियारपुर
और
माही
वृहद
सिंचाई
परियोजनाओं
के
बांध
पूर्ण
कर
लिये
गये
हैं।
संकल्प
2010 में
निर्धारित
सिंचाई
के
लक्ष्यों
को
हम
समय
से
पहले
प्राप्त
कर
लेंगे।
नर्मदा
घाटी
की
वृहद
परियोजनाओं
से
अब
तक
6 लाख
90 हजार
हैक्टेयर
सिंचाई
क्षमता
निर्मित
की
जा
चुकी
है।
बाणसागर
परियोजना
तथा
महान
परियोजना
की
नहरों
से
विन्ध्य
क्षेत्र
का
बड़ा
रकबा
अब
सिंचित
हो
रहा
है।
जलाभिषेक
अभियान
में
जनसहयोग
से
7 लाख
से
अधिक
संरचनाएं
बनीं
जिससे
1 लाख
हैक्टेयर
भूमि
सिंचित
हुई
है।
प्रदेश
में
कपिल
धारा
योजना
में
अभी
तक
2
लाख
17
हजार
कुएं
तथा
8500
बलराम
ताल
निर्मित
किये
गये
हैं।
विद्युत
प्रदेश
में
अब
उपलब्ध
विद्युत
क्षमता
9000 मेगावॉट
है
जिसमें
अगले
3 साल
में
4745 मेगावॉट
की
वृध्दि
करने
का
लक्ष्य
है।
श्री
सिंगाजी,
सतपुड़ा
तथा
दादा
धूनीवाले
परियोजना
पर
तेजी
से
काम
चल
रहा
है
जिनमें
राज्य
शासन
द्वारा
कुल
परियोजना
लागत
राशि
रुपये
9782 करोड़
में
से
रुपये
1956 करोड़
अंशपूँजी
के
रूप
में
प्रदान
किए
जा
रहे
हैं।
हमारा
प्रयास
है
कि
5157 करोड़
रुपये
की
लागत
से
फीडर
विभक्तिकरण
का
काम
अगले
1 साल
में
पूरा
कर
लिया
जाये
ताकि
गांव
में
24 घंटे
घरेलू
और
8 घंटे
कृषि
कार्यों
के
लिए
बिजली
प्रदाय
की
जा
सके।
किसान
को
बिजली
की
बढ़ी
दरों
से
बचने
के
लिए
लगभग
1470 करोड़
रुपये
का
अनुदान
दिया
जा
रहा
है।
नई
जल
विद्युत
नीति
के
अन्तर्गत
25 मेगावॉट
तक
की
परियोजनाओं
को
उद्योग
का
दर्जा
देकर
सुविधाएं
दी
जायेंगी।
वैकल्पिक
ऊर्जा
के
स्त्रोत
विकसित
करने
की
दिशा
में
484 गांव
सौर
ऊर्जा
से
रोशन
किये
गये।
सड़क
हमारा
प्रयास
है
कि
प्रदेश
में
सड़कों
के
निर्माण
में
और
गति
लायी
जाये।
सरकार
ने
मध्यप्रदेश
सड़क
विकास
निगम
के
माध्यम
से
16000 करोड़
रुपये
की
लागत
से
6690 कि.मी.
लम्बाई
की
राजमार्ग/जिला
मार्ग
की
सड़कों
का
कार्य
हाथ
में
लिया
है।
इसके
अतिरिक्त
विभागीय
मद
से
3779 करोड़
रुपये
की
लागत
से
3585 कि.मी.
की
सड़कों
का
कार्य
भी
कराया
जा
रहा
है।
सड़क
संधारण
के
लिये
537 करोड़
रुपये
राशि
का
विशेष
प्रावधान
किया
गया।
इसके
अतिरिक्त
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
के
तहत
इस
वर्ष
1857 कि.मी.
सड़कों
का
निर्माण
एवं
1463 कि.मी.
नवीनीकरण
कर
311 ग्रामों
को
मुख्य
सड़कों
से
जोड़ा
गया
है।
इसी
प्रकार
मुख्यमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
के
अन्तर्गत
288 कि.मी.
सड़क
तथा
3000 पुल-पुलिया
बन
चुके
हैं।
प्रदेश
में
4708 कि.मी.
राष्ट्रीय
राजमार्गों
का
संधारण
और
विकास
करने
के
लिये
हम
केन्द्र
सरकार
से
निरन्तर
आग्रह
कर
रहे
हैं।
ग्राम
पंचायत
ग्राम
पंचायतों
के
बुनियादी
विकास
कार्यों
के
लिए
पंच
परमेश्वर
योजना
शुरू
की
गयी
है।
इस
योजना
के
अन्तर्गत
प्रत्येक
पंचायत
को
उसकी
जनसंख्या
के
मान
से
5 से
15 लाख
रुपये
की
राशि
प्रतिवर्ष
दी
जायेगी।
रोजगार
गारन्टी
योजना
के
माध्यम
से
इस
साल
25 लाख
परिवार
लाभांवित
हुए
तथा
56 हजार
विकास
कार्य
पूर्ण
किये
गये।
मुख्यमंत्री
ग्रामीण
आवास
मिशन
में
एक
लाख
परिवारों
को
आवास
देने
का
महत्वाकांक्षी
कार्यक्रम
आरंभ
हो
चुका
है।
पंचायतों
को
सुदृढ़
करने
के
लिए
ग्राम
सचिवों
का
जिला
काडर
बनाया
गया
है।
500 से
अधिक
आबादी
वाले
गांवों
के
लिए
मुख्यमंत्री
पेयजल
योजना
के
अन्तर्गत
1250 योजनाएं
पूरी
की
जा
चुकी
हैं
तथा
480 प्रगति
पर
हैं।
पिछले
3 सालों
में
2100 नल-जल
योजनाएं
पूर्ण
की
गयी
हैं।
सभी
बसाहटों
में
40 लीटर
प्रति
व्यक्ति
प्रतिदिन
के
मान
से
पेयजल
की
व्यवस्था
की
गयी
है
जिसे
बढ़ाकर
अब
55 लीटर
किया
जायेगा।
ग्रामीण
परिवहन
सेवा
शुरू
करने
वाला
मध्यप्रदेश,
देश
का
पहला
राज्य
है।
अधोसंरचना
प्रदेश
की
अधोसंरचना
में
जन-निजी
भागीदारी
की
लगभग
12000 करोड़
रुपये
लागत
की
परियोजनाओं
का
क्रियान्वयन
किया
जा
रहा
है।
भोपाल
और
इंदौर
में
मेट्रो
रेल
का
सर्वे
पूरा
कर
विस्तृत
योजना
बनाने
की
कार्यवाही
शुरू
हो
चुकी
है।
नगरीय
निकायों
को
सुदृढ़
करने
के
लिए
नगरीय
राजस्व
और
वित्त
सेवा
का
गठन
किया
जा
रहा
है।
प्रदेश
में
शहरी
गरीबों
के
लिए
आवास
उपलब्ध
कराने
के
लिए
भी
प्रभावी
पहल
की
जा
रही
है।
भोपाल
में
नर्मदा
जलप्रदाय
परियोजना
पूर्ण
हो
गयी
है।
पहली
बार
राज्य
के
बजट
में
नगरों
की
पेयजल
व्यवस्था
सुदृढ़
करने
के
लिए
पृथक
प्रावधान
किया
गया
है।
सिंहस्थ
2016 की
तैयारी
अभी
से
शुरू
कर
दी
गयी
है।
मध्यप्रदेश
देश
में
''पथ
पर
विक्रय
करने
वालों
की
जीविका
का
संरक्षण
और
विक्रय
का
विनियमन
अधिनियम''
के
साथ
समग्र
सामाजिक
सुरक्षा
योजना
लागू
करने
वाला
पहला
राज्य
है।
इससे
सड़कों
के
किनारे
बैठकर
तथा
फेरी
लागकर
अपनी
रोजी-रोटी
कमाने
वाले
मेहनतकश
लोग
सम्मान
के
साथ
व्यवसाय
कर
सकेंगे।
विद्यार्थी
पंचायत
युवा
शक्ति
प्रदेश
के
नवनिर्माण
की
आधारशिला
है।
विद्यार्थी
पंचायत
में
हुए
विचार-विमर्श
के
बाद
राज्य
युवा
आयोग,
विद्यार्थी
कल्याण
के
लिए
50 करोड़
की
राशि
का
शिक्षा
कोष
स्थापित
करने
का
निर्णय
लिया
गया।
उच्च
शिक्षा
ऋण
गारंटी
योजना
को
सरल
बनाकर
7 लाख
तक
की
राशि
पर
ब्याज
का
50
प्रतिशत
अनुदान
का
प्रावधान
किया
गया
है।
सभी
महाविद्यालयों
में
महिला
प्रकोष्ठ
गठित
किये
जा
रहे
हैं।
शिक्षा
छात्राओं
के
साथ
अब
छात्रों
को
भी
नि:शुल्क
साइकिल
और
गणवेश
दिये
जा
रहे
हैं।
कस्तूरबा
गांधी
आवासीय
बालिका
स्कूलों
में
8100 सीट
बढ़ाई
गयी।
201 पिछड़े
विकासखण्डों
में
मॉडल
स्कूल
खोले
गये
तथा
82 हजार
शिक्षकों
के
नियोजन
की
कार्रवाई
की
गयी
है।
देश
की
नयी
पीढ़ी
के
नैतिक
विकास
और
उसमें
सकारात्मक
दृष्टिकोण
विकसित
करने
के
लिए
स्कूली
पाठयक्रम
में
भगवद्गीता
के
प्रासंगिक
अंश
सम्मिलित
किये
जा
रहे
हैं।
इसी
उद्देश्य
से
अन्य
पवित्र
ग्रंथों
के
संदर्भों
का
समावेश
भी
किया
जायेगा।
राष्ट्रभाषा
के
प्रयोग
को
और
व्यापक
बनाने
के
उद्देश्य
से
अटलबिहारी
वाजपेयी
हिन्दी
विश्वविद्यालय
की
स्थापना
की
गयी
है।
व्यवसायिक
और
तकनीकी
शिक्षा
से
संबंधित
संस्थाओं
का
विस्तार
करते
हुए
8 नये
पॉलीटेक्निक
और
50 आईटीआई
प्रारंभ
किये
गये।
उद्योगों
की
आवश्यकताओं
के
अनुरूप
कौशल
विकसित
करने
के
महत्वाकांक्षी
कार्यक्रम
के
अंतर्गत
113
विकासखण्डों
में
केन्द्र
शुरू
किये
जा
चुके
हैं।
स्वास्थ्य
सेवा
प्रदेश
में
स्वास्थ्य
सेवाओं
के
विस्तार
से
अब
संस्थागत
प्रसव
82 प्रतिशत
हो
गया
है।
गंभीर
कुपोषित
बच्चों
के
लिए
258 पुनर्वास
केन्द्र
संचालित
हैं।
बच्चों
में
कुपोषण
को
मिटाने
की
चुनौती
का
सामना
करने
के
लिए
अटल
बाल
आरोग्य
पोषण
मिशन
ने
अपना
काम
आरम्भ
कर
दिया
है।
33 जिलों
में
नवजात
शिशु
गहन
चिकित्सा
इकाइयां
स्थापित
हैं।
परिणामस्वरूप
शिशु
मृत्यु
दर
तेजी
से
घटकर
अब
62 प्रति
हजार
हो
गई
है।
दीनदयाल
अंत्योदय
उपचार
योजना
में
उपचार
सीमा
बढ़ाकर
30 हजार
रुपये
की
गयी।
मुख्यमंत्री
बाल
हृदय
उपचार
योजना
का
लाभ
850 हृदयरोगी
बच्चों
को
मिला
है।
108
एंबुलेंस
सेवाओं
का
विस्तार
सभी
जिलों
में
किया
जा
रहा
है।
देशी
और
वैकल्पिक
चिकित्सा
पध्दतियों
को
बढ़ावा
देने
के
लिए
जिला
चिकित्सालयों
में
आयुष
विंग
स्थापित
किये
गये
हैं
और
148
नये
आयुष
औषधालय
खोले
जा
रहे
हैं।
बेटी
बचाओ
अभियान
हम
माताओं,
बहनों
और
बेटियों
के
सामाजिक
और
आर्थिक
स्तर
में
गुणात्मक
सुधार
के
लिए
प्रतिबध्द
हैं।
यह
सरकार
और
समाज
के
संयुक्त
प्रयास
से
ही
संभव
हो
सकेगा।
बालिकाओं
के
संरक्षण
और
सम्मान
तथा
लिंग
अनुपात
के
संतुलन
को
बनाये
रखने
के
लिए
बेटी
बचाओ
अभियान
शुरू
किया
गया
है।
इस
पहल
को
प्रदेशभर
में
व्यापक
समर्थन
मिल
रहा
है।
लाड़ली
लक्ष्मी,
कन्यादान,
उषा
किरण,
प्रतिभा
किरण,
गांव
की
बेटी,
जननी
सुरक्षा
आदि
योजनाओं
के
माध्यम
से
महिला
सशक्तीकरण
के
संकल्प
को
पूरा
किया
जा
रहा
है।
गांव
की
बेटी
योजना
का
लाभ
अब
निजी
महाविद्यालयों
में
पढ़ने
वाली
बालिकाओं
को
भी
मिलेगा।
आंगनवाड़ी
कार्यकर्ताओं
और
सहायिकाओं
के
मानदेय
को
दोगुना
कर
दिया
गया
है।
सामाजिक
सुरक्षा
समाज
के
कमजोर
और
वंचित
वर्गों
के
लोगों
को
उनके
कल्याण
और
विकास
की
योजनाओं
का
बेहतर
लाभ
उपलब्ध
कराने
के
लिए
समग्र
सामाजिक
सुरक्षा
कार्यक्रम
लागू
किया
जायेगा।
स्पर्श
अभियान
में
साढ़े
आठ
लाख
नि:शक्तजन
चिन्हित
किये
गये।
इनमें
से
7 लाख
15 हजार
को
प्रमाण-पत्र
देने
के
साथ
एक
लाख
से
ज्यादा
को
कृत्रिम
अंग
भी
उपलब्ध
करवाये
गये।
प्रदेश
में
लगभग
डेढ़
लाख
वनवासियों
को
वन
अधिकार
पत्र
दिये
गये
हैं
तथा
उन्हें
अब
कृषि
संबंधी
सुविधाएं
उपलब्ध
करायी
जा
रही
हैं।
मध्यप्रदेश,
वनोपज
संग्राहकों
को
उचित
मूल्य
दिलाने
के
लिए
अचार
गुठली,
लाख,
महुआ,
गुल्ली,
महुआ
बीज,
हर्रा,
करंज
बीज
और
नीम
बीज
का
समर्थन
मूल्य
घोषित
करने
वाला
देश
का
प्रथम
राज्य
है।
छात्रावास
आश्रम
आदिवासी
विद्यार्थियों
के
लिए
छात्रावासों
और
आश्रमों
में
कुल
5400 सीटें
बढ़ायी
गयी
हैं।
21 प्रीमैट्रिक
छात्रावास
और
40 आश्रम
शालाएं
स्वीकृत
की
गयी
हैं।
अनुसूचित
जातियों
के
विकास
और
कल्याण
से
संबंधित
योजनाओं
के
प्रभावी
क्रियान्वयन
के
लिए
पृथक
विभाग
गठित
किया
गया
है।
विशेष
भर्ती
अभियान
में
अनुसूचित
जाति
के
लगभग
साढ़े
आठ
हजार,
अनुसूचित
जनजाति
के
साढ़े
सत्रह
हजार
और
अन्य
पिछड़े
वर्ग
के
चार
हजार
सात
सौ
पचास
पद
भरे
गये
हैं।
पिछड़े
वर्ग
के
विद्यार्थियों
के
लिए
छात्रगृह
योजना
और
शिक्षित
बेरोजगारों
के
लिए
गुणवत्तापूर्ण
प्रशिक्षण
कार्यक्रम
लागू
किया
गया
है।
विमुक्त,
घुमक्कड़
एवं
अर्धघुमक्कड़
जातियों
के
विकास
को
गति
देने
के
लिए
अब
नया
विभाग
गठित
किया
गया
है।
सामान्य
निर्धन
वर्ग
कल्याण
आयोग
सामान्य
निर्धन
वर्ग
कल्याण
आयोग
की
अनुशंसाओं
के
अनुरूप
निर्धन
बच्चों
को
शिक्षा
एवं
स्वास्थ्य
का
लाभ
मिला
है।
अल्पसंख्यक
शिक्षित
बेरोजगारों
के
प्रशिक्षण
तथा
उनके
स्वरोजगार
की
योजना
लागू
की
गयी
है।
सार्वजनिक
वितरण
प्रणाली
को
प्रभावी
बनाने
के
लिए
बार
कोडेड
राशन
कार्ड
एवं
फूड
कूपन
के
माध्यम
से
उपभोक्ताओं
को
राशन
देने
की
व्यवस्था
अगले
एक
साल
में
पूरे
प्रदेश
में
लागू
कर
दी
जायेगी।
राशन
पहुंचाने
वाले
वाहनों
की
निगरानी
के
लिए
ट्रेकिंग
व्यवस्था
का
कार्य
प्रारंभ
किया
जावेगा।
निवेश
मित्र
राज्य
मध्यप्रदेश
की
पूरे
देश
में
निवेश
मित्र
राज्य
के
रूप
में
पहचान
बनी
है।
इस
वर्ष
अक्टूबर
माह
में
इंदौर
में
ग्लोबल
इन्वेस्टर
मीट
आयोजित
होगी।
सरकार
की
उद्योग
हितैषी
नीतियों
के
फलस्वरूप
कुल
82 हजार
9 सौ
करोड़
रुपये
की
परियोजनाएं
स्थल
पर
मूर्त
रूप
ले
रही
हैं।
पुराने
औद्योगिक
केन्द्रों
के
संधारण
के
लिए
प्रथम
चरण
में
रुपये
311 करोड़
राशि
की
विशेष
व्यवस्था
की
गयी
है।
रुपये
255 करोड़
के
व्यय
से
07 जिलों
में
नये
औद्योगिक
क्षेत्र
स्थापित
करने
का
कार्य
प्रगति
पर
है।
बुंदेलखण्ड
क्षेत्र
के
तीव्र
औद्योगिक
विकास
की
दृष्टि
से
सागर
में
एक
पृथक
औद्योगिक
केन्द्र
विकास
निगम
स्थापित
किया
जा
रहा
है।
सूक्ष्म
और
लघु
उद्योगों
को
प्रोत्साहित
करने
के
लिए
पृथक
विभाग
का
गठन
किया
जावेगा।
सुशासन
दिवस
प्रत्येक
वर्ष
24 दिसम्बर
सुशासन
दिवस
के
रूप
में
मनाने
का
निर्णय
लिया
गया
है।
प्रशासन
को
अधिक
जवाबदेह
और
जनोन्मुखी
बनाने
के
साथ
व्यवस्थाओं
में
ऐसे
सभी
संस्थागत
सुधार
किये
जा
रहे
हैं
जिससे
भ्रष्टाचार
पर
प्रभावी
अंकुश
लगा
रहे।
ई-टेण्डरिंग,
ई-पेमेन्ट
और
शासकीय
भर्तियों
में
पारदर्शिता
के
अच्छे
परिणाम
मिले
हैं।
प्रदेश
में
सूचना
प्रौद्योगिकी
का
उपयोग
पारदर्शिता
तथा
कार्य
दक्षता
बढ़ाने
के
लिए
किया
जा
रहा
है।
मध्यप्रदेश
लोक
सेवाओं
के
प्रदान
की
गारन्टी
अधिनियम
के
अन्तर्गत
अब
16 विभागों
की
52 सेवाएं
अधिसूचित
की
गयी
हैं।
अब
तक
लगभग
87
लाख
आवेदक
इसका
लाभ
ले
चुके
हैं।
हमें
आशा
है
कि
भ्रष्टाचार
के
मामलों
में
जल्दी
सुनवाई
कर
भ्रष्ट
तरीकों
से
अर्जित
सम्पत्ति
को
जप्त
करने
के
हमारे
कानून
को
केन्द्र
शासन
जल्दी
स्वीकृति
देगा।
शांति
और
सद्भाव
यह
सरकार
के
दृढ़
संकल्प
का
परिणाम
है
कि
सम्पूर्ण
प्रदेश
में
शांति
और
सद्भाव
का
वातावरण
है।
प्रदेश
में
कानून
और
व्यवस्था
के
मामले
में
कोई
समझौता
नहीं
किया
जा
सकता।
असामाजिक
गतिविधियों
तथा
संगठित
अपराधों
पर
कठोर
अंकुश
है।
डकैतों,
नक्सलवादियों,
खनिज
एवं
भू-माफियाओं
के
विरुध्द
सफल
अभियान
की
सर्वत्र
सराहना
हुई
है।
चिन्हित
अपराधों
के
आरोपियों
को
शीघ्र
दण्ड
दिलाने
में
उल्लेखनीय
सफलता
मिली
है।
सम्मान
निधि
देश
के
स्वतंत्रता
संग्राम
के
सेनानियों
तथा
लोकतंत्र
के
प्रहरी
मीसा
बन्दियों
के
प्रति
अपनी
कृतज्ञता
की
अभिव्यक्ति
के
रूप
में
राज्य
शासन
ने
उनकी
सम्मान
निधि
में
वृध्दि
का
विनम्र
प्रयास
किया
है।
शौर्य
स्मारक
और
वीर
भारत
की
स्थापना
से
नई
पीढ़ी
राष्ट्रीय
आदर्शों,
बलिदानों
एवं
सांस्कृतिक
विरासत
से
परिचित
और
प्रेरित
होगी।
आइये ,
हम
सब
प्रदेश
के
नवनिर्माण
का
संकल्प
लें।
अपने
अधिकारों
से
पहले
अपने
कर्तव्यों
को
पहचानें
और
यह
जाने
कि
अपने
दायित्वों
के
उत्कृष्ट
निर्वहन
से
ही
हमारी
प्रगति
और
विकास
का
मार्ग
प्रशस्त
होगा।
कवि
भवानी
प्रसाद
मिश्र
ने
कहा
है
-
'' अंधेरा
हटाते हुए हम चलेंगे
अंधेरे
की
ताकत
बहुत
घट
गयी
है,
उठो ,
ऑंख
खोलो
कि
पौ
फट
गयी
है
युगों
की
अंधेरी
निशा
छँट
गयी
है।''
जय
भारत।
जय
मध्यप्रदेश।
2
Top
सहकारिता
विभाग
की
समीक्षा
सहकारी
समितियों
को
मजबूत
बनाएं
- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
भोपाल
में
27 जनवरी
को
सहकारिता
विभाग
की
त्रैमासिक
समीक्षा
बैठक
में
कहा
कि
प्रदेश
में
सहकारिता
आंदोलन
के
विस्तार
के
लिये
सभी
सहकारी
समितियों
को
मजबूत
बनाया
जायेगा
और
प्रत्येक
परिवार
को
इन
समितियों
से
जोड़ा
जायेगा।
उन्होंने
कहा
कि
अनुसूचित
जाति
और
अनुसूचित
जनजातियों
के
किसानों
को
सहकारी
समितियों
से
जोड़ने
के
लिये
विशेष
प्रयास
करने
की
आवश्यकता
है।
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
प्रदेश
में
सहकारिता
आंदोलन
को
विस्तार
देने
के
लिये
सभी
प्रकार
की
सहकारी
समितियों
को
मजबूत
बनाने
और
प्रत्येक
परिवार
को
इन
समितियों
से
जोड़ने
के
निर्देश
दिये
हैं।
श्री
चौहान
भोपाल
में
27 जनवरी
को
मंत्रालय
में
सहकारिता
विभाग
की
त्रैमासिक
प्रगति
और
कार्ययोजनाओं
की
समीक्षा
कर
रहे
थे।
मुख्यमंत्री
ने
वैद्यनाथन
समिति
की
अपेक्षाओं
को
पूरी
करने
के
लिये
विशेष
तैयारी
करने
के
निर्देश
दिये।
खाद
वितरण
और
अनाज
भंडारण
में
मैदानी
स्तर
पर
आने
वाली
समस्याओं
के
संदर्भ
में
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
खाद
का
अग्रिम
भण्डारण
करने
के
लिए
व्यवस्था
बनाने
के
अलावा
किसानों
को
भी
शिक्षित
करने
की
जरूरत
है।
अनुसूचित
जाति
और
जनजातियों
के
किसानों
को
सहकारी
समितियों
से
जोड़ने
के
लिये
विशेष
प्रयास
करने
की
आवश्यकता
है।
इसके
अलावा
सहकारिता
ऋण
की
वसूली
शत-प्रतिशत
करने
के
लिए
किसानों
को
समझाने
की
जरूरत
है।
किसान
क्रेडिट
कार्ड
बैठक
में
बताया
गया
कि
प्रदेश
में
71.50 लाख
किसान
हैं।
इनमें
से
68.22 लाख
को
क्रेडिट
कार्ड
मिल
चुके
हैं।
वर्ष
2011-12 के
लिये
तीन
लाख
क्रेडिट
कार्ड
वितरण
का
लक्ष्य
रखा
गया
है।
दिसम्बर
2011 तक
3.94 लाख
किसान
क्रेडिट
कार्ड
वितरित
हो
चुके
हैं।
अब
3.28 लाख
किसान
शेष
हैं
जिन्हें
क्रेडिट
कार्ड
जारी
किया
जाना
है।
मुख्यमंत्री
ने
इस
कार्य
में
तेजी
लाने
के
निर्देश
दिये
हैं।
उर्वरक
वितरण
के
संबंध
में
बताया
गया
कि
2011-12 में
जनवरी
2012 तक
4500 से
ज्यादा
वितरण
केन्द्रों
से
21.64 लाख
मीट्रिक
टन
उर्वरक
वितरित
किया
जा
चुका
है।
उर्वरक
वितरण
व्यवस्था
को
और
अधिक
सक्षम
बनाया
जा
रहा
है।
धान
उपार्जन
के
संबंध
में
बताया
गया
कि
2011-12 में
618
केन्द्रों
के
माध्यम
से
5.42
लाख
मीट्रिक
टन
धान
उपार्जन
किया
गया।
किसानों
को
612
करोड़
का
भुगतान
किया
गया
जिसमें
राज्य
शासन
को
27.11
करोड़
का
बोनस
शामिल
है।
3
Top
लंदन
ओलिम्पिक
- 2012
डाउ
केमिकल्स
का
कड़ा
विरोध
हो
मुख्यमंत्री
श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
लंदन
ओलिम्पिक
2012 के
प्रायोजक
के
रूप
में
भाग
लेने
वाली
डाउ
केमिकल्स
को
नहीं
हटाने
पर
गहरा
खेद
व्यक्त
करते
हुए
प्रधानमंत्री
डॉ.
मनमोहन
सिंह
को
पत्र
लिखकर
कहा
है
कि
इस
संबंध
में
भारत
सरकार
कड़ा
विरोध
दर्ज
करे।
ओलिम्पिक
आयोजन
समिति
द्वारा
डाउ
केमिकल्स
को
नहीं
हटाने
पर
केन्द्र
सरकार
ओलिम्पिक
में
भारत
की
भागीदारी
से
मना
करे।
इस
संबंध
में
मुख्यमंत्री
श्री
चौहान
ने
सस्टेनेबिलिटी
कमीशन
की
वरिष्ठ
सदस्य
सुश्री
मेरिडिथ
एलेक्जेंडर
के
त्याग
पत्र
की
ओर
प्रधानमंत्री
का
ध्यान
आकर्षित
किया
है।
श्री
चौहान
ने
अपने
पत्र
में
कहा
कि
डाउ
केमिकल्स
विश्व
की
भीषणतम
भोपाल
गैस
त्रासदी
से
जुड़ी
है।
पूरी
दुनिया
में
मानव
अधिकारों
के
संरक्षण
से
जुड़े
लोगों
और
संस्थाओं
के
विरोध
के
बावजूद
डाउ
केमिकल्स
को
प्रायोजक
के
रूप
में
शामिल
किया
गया
है।
यह
किसी
भी
रूप
में
मान्य
नहीं
हो
सकता।
श्री
चौहान
ने
कहा
कि
डाउ
केमिकल्स
भोपाल
गैस
त्रासदी
में
लाखों
लोगों
की
अकाल
मृत्यु
की
जिम्मेदार
है।
उन्होंने
कहा
कि
इस
संबंध
में
पहले
भी
केन्द्रीय
खेल
मंत्री
श्री
अजय
माकन
को
पत्र
भेजकर
जनभावनाओं
से
अवगत
कराया
गया
है।
Top |
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