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कैरियर

खाद्य प्रौद्योगिकी में कॅरियर के उजले अवसर

'रोज़गार और निर्माण' के पाठकों के लिए 'कॅरियर की राहें' नाम से उपयोगी स्तंभ लगातार प्रकाशित किया जा रहा है। युवाओं को कॅरियर की विभिन्न विधाओं से परिचित कराने और कॅरियर के रास्तों पर आगे बढ़ने के लिए सफल दिशाएँ देने वाला 'कॅरियर की राहें' स्तंभ नियमित रूप से महीने में दो बार कॅरियर काउंसलर श्रीमती मीना भंडारी द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। श्रीमती भंडारी पिछले 21 सालों से कॅरियर विषयों पर लिख रही हैं।

वर्तमान के आपाधापी वाले जीवन में लोगों के पास समय का बहुत अभाव है। कामकाजी युवतियों के पास किचन में काम करने हेतु समय ही उपलब्ध नहीं है। समय के अभाव एवं भोजन की बदलती हुई आदतों के  कारण डिब्बाबंद प्रसंस्कृत भोजन एवं पेय पदार्थों का प्रचलन हमारे देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान में भोजन की समग्र अवधारणा ही पूर्णत: बदल गई है। कृषि पर आधारित खाद्य प्रौद्योगिकी ने रोजगार एवं कॅरियर के काफी अच्छे एवं उजले अवसर खोल दिए हैं। इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगभग ढाई लाख से अधिक रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। दिन-प्रतिदिन आबादी विद्युत गति से बढ़ती जा रही है तथा खेती की भूमि निरंतर कम होती जा रही है। इससे उत्पादन एवं उपभोग के बीच अंतर बढ़ता ही जा रहा है। इस अंतर को खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण के इस्तेमाल द्वारा कम किया जा सकता है। खाद्य प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर बहुत बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री का प्रसंस्करण कर उन्हें खराब होने से बचाया जा सकता है तथा बेहतर गुणवत्ता और पोषक तत्वों से युक्त भोज्य सामग्री बाजार में उपभोग हेतु उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे रोजगार के अवसरों में भी भारी वृध्दि होगी। विकसित देशों की तुलना में भारत में खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण उद्योग तुलनात्मक रूप से पिछड़ा हुआ है। यूँ तो हमारे देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सदियों पुराना है। प्राचीनकाल से ही महिलाएँ घरों में अचार-मुरब्बा, अमचूर आदि का निर्माण करती रही हैं परंतु यह अभी भी कुटीर उद्योग ही है। परंतु अब धीरे-धीरे विश्व के साथ कदमताल करते हुए आधुनिक तकनीक  वाली खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ हमारे देश में लगाई जा रही हैं। इन इकाइयों से उत्पादित उत्पादों की गुणवत्ता विश्व कोटि की होती है।

मूल्य संवर्धित वनस्पतियों, सब्जियों, फलों, मवेशी उत्पादों के प्रसंस्कृत स्वरूप के निर्यात की भारत में बहुत संभावनाएँ हैं। डेयरी उत्पाद, मांस, पोल्ट्री उत्पाद तथा समुद्री उत्पादों की भी विदेशों में बहुत भारी माँग है। दुग्ध उत्पादन में तो भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। सब्जियों के उत्पादन में भी भारत का विश्व में पहला और फलों के उत्पादन में दूसरा स्थान है। विश्व के  आम उत्पादन का पचास प्रतिशत भारत में होता है। यदि खाद्य प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्करण का समुचित प्रयोग किया जाए तो भारत इस क्षेत्र में विश्व का सिरमौर बनने की क्षमता रखता है।

किसी भी खाद्य प्रौद्योगिकी कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रशिक्षित खाद्य प्रौद्योगिकीविद् का होना बेहद जरूरी है। खाद्य प्रौद्योगिकीविद् समुचित प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करके कम लागत पर उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पाद तैयार करते हैं। खाद्य प्रौद्योगिकीविद् को उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, विपणन और खरीद जैसे भिन्न-भिन्न कार्य करने होते हैं। भारत में प्रति वर्ष बड़ी भारी संख्या में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खाद्य प्रौद्योगिकीविद् तैयार हो रहे हैं। सीएफटीआरआई, मैसूर खाद्य अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में देश में अग्रणी संस्थान है। देश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों एवं सामान्य विश्वविद्यालयों द्वारा भी खाद्य उद्योग की जरूरतें पूरी करने के लिए बी.टेक./बी.एससी./एम. टेक./एम.एससी. और पीएच.डी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम संचलित किए जा रहे हैं।

विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रमों में प्रवेश, प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रदान किया जाता है। सीएफटीआरआई, मैसूर अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षा का आयोजन करता है। राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर उपाधि की पच्चीस प्रतिशत सीटें अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा के आधार पर भरी जाती हैं। बी.टेक./बी.एससी. पाठयक्रम में प्रवेश हेतु विज्ञान (फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स/बॉयोलॉजी) में बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण की हो, एम.टेक. पाठयक्रम के लिए खाद्य प्रौद्योगिकी/कृषि/रसायन इंजीनियरी में बी.टेक. तथा एम. एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी के लिए फिजिक्स केमेस्ट्री, मैथ्स/लाइफ साइंस में बी.एससी./कृषि/खाद्य प्रौद्योगिकी में बी.एससी. परीक्षा उत्तीर्ण की हो। बी.टेक. चार वर्ष की अवधि का पाठयक्रम है तथा बी.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम की अवधि तीन वर्ष निर्धारित है। एम.टेक. तथा एम.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम की अवधि दो वर्ष निर्धारित है।

खाद्य प्रौद्योगिकीविदों हेतु कॅरियर की काफी उजली संभावनाएँ व्याप्त हैं। खाद्य प्रौद्योगिकीविदों को विभिन्न संगठनों में अच्छा रोजगार दिया जाता है। इनमें सरकारी, सहकारी तथा विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ शामिल हैं। खाद्य प्रौद्योगिकीविदों को एफसीआई मैनेजर्स, अनुसंधान संगठनों, बीआईएस., एग्मार्क इंस्पेक्टरों, खाद्य इंस्पेक्टर, आदि के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। प्राइवेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ जैसे कोका कोला, पेप्सी, कैडबरी, ग्लेक्सो इंडिया, पारले, ब्रिटानिया, वाडिलाल, क्वालिटी वाल्स, मैक्डोनॉल्ड, निरूलाज आदि में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ हैं। विनिर्माण घरानों से लेकर विपणन घरानों तक में खाद्य प्रौद्योगिकीविदों हेतु रोजगार की ढेरों संभावनाएँ हैं।

खाद्य प्रौद्योगिकी से संबंधित पाठयक्रम संचालित करने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं -

  • सीएफटीआरआई, मैसूर (कर्नाटक)- इस संस्थान में एम.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी और पीएच.डी. पाठयक्रम उपलब्ध हैं। इस पाठयक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी इस संस्थान की वेबसाइट .ड़ढद्यध्दत्.ड़दृ से प्राप्त की जा सकती है।

  • जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर- यहाँ एम.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम उपलब्ध है। इस पाठयक्रम से संबंधित विस्तृत जानकारी वेबसाइट .त्र्त्ठ्ठत्र्त्.ङ्ढड्डद्व से प्राप्त की जा सकती है।

  • आई.आई.टी. खड़गपुर, पश्चिम बंगाल- यहाँ खाद्य प्रौद्योगिकी में एम.टेक. तथा पीएच.डी. पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • संत लोंगोवाल इंस्टीटयूट ऑफ फूड एंड टेक्नोलॉजी लोंगोवाल, संगरूर पंजाब- यहाँ खाद्य प्रौद्योगिकी में बी.टेक. और एम.टेक. पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • सीसीएसएचयूए, हिसार, हरियाणा- यहाँ एम.एससी. फूड टेक्नोलॉजी पाठयक्रम उपलब्ध है।

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तरप्रदेश- यहाँ में एम.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम उपलब्ध है।

  • जीएन-डीयू, अमृतसर पंजाब- यहाँ बी.टेक., एम.एससी. एवं पीएच.डी. पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • एचबीटीआई, कानपुर, उ.प्र.- यहाँ एम.टेक. और बी.टेक. पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा- यहाँ एम.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद, आंध्रप्रदेश- यहाँ बी.टेक. और एम.एससी. खाद्य प्रौद्योगिकी पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंस फॉर वूमैन, दिल्ली- यहाँ खाद्य प्रौद्योगिकी में बी.एससी. पाठयक्रम उपलब्ध हैं।

  • मध्यप्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में खाद्य प्रौद्योगिकी से संबंधित पाठयक्रम उपलब्ध हैं।  प्रदेश के विद्यार्थी अपने-अपने क्षेत्र के विश्वविद्यालयों में ऐसे पाठयक्रम के लिए संपर्क कर सकते हैं।

 

 
 
     
     

 

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