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कैरियर
एस्ट्रोनॉमी में कॅरियर के उजले अवसर
'रोज़गार
और निर्माण'
के पाठकों के लिए
'कॅरियर
की राहें'
नाम से उपयोगी स्तंभ
लगातार प्रकाशित किया जा रहा है। युवाओं को कॅरियर की विभिन्न विधाओं
से परिचित कराने और कॅरियर के रास्तों पर आगे बढ़ने के लिए सफल दिशाएँ
देने वाला 'कॅरियर
की राहें'
स्तंभ नियमित रूप से
महीने में दो बार कॅरियर काउंसलर श्रीमती मीना भंडारी द्वारा प्रस्तुत
किया जाता है। श्रीमती भंडारी पिछले
21
सालों से कॅरियर विषयों पर लिख रही हैं।
ए स्ट्रोनॉमी
अर्थात अंतरिक्ष विज्ञान,
विज्ञान की एक शाखा है,
जिसके अंतर्गत
पृथ्वी से परे करोड़ों ग्रह,
उपग्रह,
तारे,
धूमकेतु,
आकाशगंगा एवं अन्य
अंतरिक्ष में उपस्थित हेवनली बॉडीज का विस्तृत अध्ययन किया जाता है।
इसके अलावा अंतरिक्ष विज्ञान के अंतर्गत उन नियमों एवं प्रभावों का भी
अध्ययन किया जाता है,
जो इन्हें संचालित करते
हैं। अंतरिक्ष विज्ञान में न केवल हेवनली बॉडीज के इतिहास की गर्त में
जाकर देखना होता है,
बल्कि उनके भविष्य में
विकास की संभावनाओं पर भी पैनी नजर रखनी होती है। पृथ्वी किस आकार की
है?
अगर पृथ्वी घूमती है तो
हमारा घर क्यों नहीं घूमता?
सूर्यग्रहण-चंद्रग्रहण क्या होता है?
क्या केवल पृथ्वी
पर ही जीवन है?
ऐसे ही अनगिनत सवालों का
हल अंतरिक्ष विज्ञान के तहत ढूंढ़ा जाता है। अंतरिक्ष विज्ञान में
कॅरियर उन हजारों रहस्यों से पर्दा उठाने का अवसर भी होता है,
जो अभी तक अनसुलझे
हैं। वहीं उनके अज्ञात से ज्ञात तक के सफर से भी रूबरू होते हैं। यह न
केवल वैज्ञानिक स्वभाव की परीक्षा होती है,
बल्कि आपकी
जिज्ञासाएँ भी स्तर दर स्तर शांत होती जाती हैं और साथ ही आप तारों की
दुनिया के जानकारों की फेहरिस्त में अपना नाम जोड़ते हैं। इसे अपना
कॅरियर चुनने वाले जहाँ देश के बेस्ट ब्रेन केटेगरी में शुमार किए जाते
हैं,
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर एक बुध्दिजीवी के रूप में भी उनकी एक विशिष्ट पहचान स्थापित होती
है।
आधुनिक तकनीक और नए-नए
वैज्ञानिक उपकरणों के विकास ने अंतरिक्ष विज्ञान को अध्ययन की एक विशेष
शाखा बना दिया है। हालांकि अंतरिक्ष विज्ञान,
विज्ञान के अन्य विषयों जितनी ही पुरानी शाखा है।
क्योंकि मानव प्राचीन समय से ही तारों और हेवनली बॉडीज की गति पर नजर
बनाए हुए है। विज्ञान और टेक्नोलॉजी के आसमान छू रहे विकास ने चाँद,
तारों व ग्रहों को करीब से जानने की सहूलियत प्रदान
कर दी है। आर्यभट्ट, भास्कर,
गेलीलियो और न्यूटन इस क्षेत्र की कुछ महानतम
हस्तियाँ हैं, जो आकाश के चमचमाते तारों से
किसी भी प्रकार से कम नहीं हैं। एस्ट्रोनॉमी में कॅरियर बनाने के लिए
सबसे पहले आपको बी.एससी. की डिग्री लेनी होगी,
जहाँ आपके विषयों में फिजिक्स एवं मैथ्स भी होना
जरूरी है। साइंस से स्नातक होने के बाद आप एस्ट्रोनॉमी थ्योरी या
एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेशन कोर्स चुन सकते हैं। वहीं मास्टर डिग्री के बाद
विशिष्ट कोर्सेज में प्रवेश लिया जा सकता है। यदि आप बारहवीं के बाद
इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल
कम्युनिकेशन में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग यानी बी.ई. करते हैं तो आप
इंस्ट्रूमेंट एस्ट्रोनॉमी या एक्सपेरिमेंटल एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में
चमकीला कॅरियर बना सकते हैं। इसी दिशा में आगे बढ़ने पर आगे एस्ट्रोनॉमी
में पीएच.डी. भी कर सकते हैं।
देश में एस्ट्रोनॉमी
के क्षेत्र में केवल मास्टर स्तर तथा पीएच.डी. प्रोग्राम ही
विश्वविद्यालयों में सामान्यत: उपलब्ध हैं। हाँ,
एकवर्षीय ज्वाइंट एस्ट्रोनॉमी प्रोग्राम इंडियन
इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बैंगलुरू चलाती है। यह प्रोग्राम इंडियन
इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, रामन रिसर्च
इंस्टीट्यूट और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च,
मुंबई के साथ मिलकर चलाया जाता है। कोर्स की
समाप्ति के बाद आपको इन्हीं इंस्टीट्यूट में से एक में पीएच.डी. की भी
ऑफर दी जाती है। टी.आई.एफ.आर. मुंबई और इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर
एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे,
ये दोनों ऐसे संस्थान हैं,
जहाँ आप कॉस्मोलॉजी में रिसर्चर के रूप में कॅरियर
बना सकते हैं। शुरुआत में आपको 2 वर्षीय
जूनियर रिसर्च फैलोशिप और बाद में सीनियर रिसर्च फैलोशिप के लिए चुना
जाता है।
अंतरिक्ष में तारों के
पैटर्न,
उनकी हलचल आदि का अध्ययन करना एक लंबा, बहुत
समय लेने वाला एवं पेचीदा काम है, इसलिए
धैर्य इस पेशे में सबसे जरूरी गुण है। अगली बेहद जरूरी विशेषता आपका
जिज्ञासु होना है। पूरे आत्मविश्वास और उत्साह से रहस्यमयी प्रश्नों के
उत्तर तलाशने होते हैं। आप में साइंटिफिक एप्रोच के अलावा प्रोग्रामिंग
स्किल भी बेहतरीन होनी जरूरी है। एस्ट्रोनॉमी में कोर्स करने के उपरांत
आप चाहें तो किसी भी रिसर्च इंस्टीट्यूट में बतौर रिसर्च साइंटिस्ट काम
कर सकते हैं। आपको भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जैसे
प्रतिष्ठित संस्थानों में भी रोजगार मिल सकता है। कुछ एक नॉन प्रॉफिट
आर्गेनाइजेशन में स्वयं खगोलीय उपकरण बनाने का मौका मिलता है,
साथ ही साथ एस्ट्रोनॉमी प्रोजेक्ट में भी काम करने
का अवसर मिलता है। अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो आपको देश-विदेश घूमने
के बहुत सारे मौके मिलेंगे, क्योंकि सेमिनार
व कांफ्रेंस आयोजनों में आए दिन विभिन्न स्थानों पर जाना जो होता है।
रिसर्च वर्क के दौरान जूनियर रिसर्चर को स्टाइपेंड के तौर पर 8
हजार रुपए मासिक व सीनियर रिसर्चर को 9
हजार रुपए मासिक आसानी से मिल जाते हैं। मेडिकल,
ट्रेवल, होटल एकमोडेशन
और हाउस रेंट आदि भत्ते अलग से दिए जाते हैं। रिसर्च वर्क समाप्ति के
बाद रोजगार के अवसर कहीं अधिक बढ़ जाते हैं। बहुत से सरकारी संस्थानों
में एस्ट्रोनॉमर की नियुक्ति की जाती है। यहाँ आपको विभिन्न साइंटिस्ट
ग्रेड के पद पर रखा जाता है जहाँ आकर्षक वेतन के अतिरिक्त आपको अन्य
लाभ भी मिलते हैं।
एस्ट्रोनॉमी का कोर्स
कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-
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नेशनल सेंटर फॉर
रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स,
पुणे, महाराष्ट्र।
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वेबसाइट-
www.ncra.tifr.res.in
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रामन रिसर्च
इंस्टीट्यूट,
बैंगलुरू, कर्नाटक।
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इंडियन इंस्टीट्यूट
ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स,
बैंगलुरू, कर्नाटक।
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इंटर यूनिवर्सिटी
सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स,
पुणे, महाराष्ट्र।
वेबसाइट-
www.iucaa.ernet.in
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फिजिक्स रिसर्च लैब,
अहमदाबाद, गुजरात।
वेबसाइट- www.prl.ernet.in
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महात्मा गाँधी
यूनिवर्सिटी,
कोट्टयम, केरल।
वेबसाइट- www. mguniversity.edu
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मदुरै कामराज
यूनिवर्सिटी,
मदुरै, तमिलनाडु।
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पंजाब यूनिवर्सिटी,
पटियाला, पंजाब।
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उस्मानिया
विश्वविद्यालय,
हैदराबाद,
आंध्रप्रदेश।
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चेन्नई
विश्वविद्यालय,
चेन्नई।
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डॉ. बाबा साहेब
अंबेडकर,
मराठवाड़ा विश्वविद्यालय,
औरंगाबाद।
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शिवाजी
विश्वविद्यालय,
कोल्हापुर।
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लखनऊ विश्वविद्यालय,
लखनऊ।
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श्रीमती मीना भंडारी
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